month vise

Thursday, September 14, 2017

हिंदी दिवस पर

poem by Umesh chandra srivastava 

                      (१)
हिंदी में बिंदी का महत्व जान लीजिये ,
सुन्दर सलोने शब्द को पहचान लीजिये। 
भाषा सुदृण है ज्ञान का अनमोल खज़ाना ,
ब्रह्माण्ड की भाषा बने यह ठान लीजिये। 

औरों की बात और है ,सम्मान सभी का ,
है प्रेम शब्द का विविध विस्तार यहाँ पे । 
हिंदी में शब्द ढेर हैं  अंग्रेजी में कहाँ ,
हिंदी हमारी माँ जननि , उत्थान कीजिये। (क्रमसः)




 उमेश चंद्र श्रीवास्तव- 
poem by Umesh chandra srivastava 

Saturday, September 2, 2017

प्रेम उपासना


                       (१ )
प्रेम उपासना ,प्रेम तपस्या ,प्रेम जगत व्यव्हार है ,
प्रेम बिना कुछ भी संभव नहीं ,प्रेम मानों का द्वार है।
प्रेम के चलते हम सब मिलते ,प्रेम परस्पर चलता है ,
मगर बाँवरे कुछ ऐसे हैं ,जिन्हें प्रेम यह खलता है।

                       (२ )
चंदा की चकोरी से कोई बात नहीं है ,
लगता है कई दिन से मुलाकात नहीं है।
वह रोज़ तो निश्चित है जब चाँद खिलेगा ,
तब चाँद स्वयं आके चकोरी से मिलेगा।





उमेश चंद्र श्रीवास्तव -

काव्य रस का मैं पुरुष हूँ

A poem of Umesh Srivastava काव्य रस का मैं पुरुष हूँ गीत गाने आ गया | खो रही जो बात मैं उसको बताने आ गया | रात चंदा ने चकोरी से कहा तुम जान ...