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Friday, August 11, 2017

बड़े कवि अगर हो ,लिखो बात ऐसी-2

poem by Umesh chandra srivastava


बड़े कवि अगर हो ,लिखो बात ऐसी ,
धरा का अँधेरा सभी मिट ही जाए।

(गतांक से आगे )

पूरी उम्र उनने करी है हिफ़ाज़त ,
ये नेता मगर बात कुछ बोलते हैं।
कहो इनसे जाये 'औ' देखे वो सरहद ,
जहां पे सिपाही लड़े जा रहे हैं।

ख़ुशी में जो झूमे वतन प्रेमी सब जन ,
उन्हें भी कहो-अब संगीने उठायें।
नहीं ठोक ताली यहां बजबजायें ,
वो भी जाके थोड़ा ही बाजू लड़ायें।(क्रमशः कल )


उमेश चंद्र श्रीवास्तव -
poem by Umesh chandra srivastava 

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