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Thursday, April 27, 2017

तुमसे नयन लड़ी जो प्रियतम

poem by Umesh chandra srivastava 

तुमसे नयन लड़ी जो प्रियतम ,
नयनों में मधुमास हुआ। 

इधर-उधर अब मत भटकाओ ,
अबतो कुछ अहसास हुआ। 

नहीं पता था प्रियतम तेरे ,
नयनों में इतना रास है। 

बाग़ -बाग़  सब उपवन हो गए ,
उहा-पोह में साँस हुआ। 

कहो बताओ किधर चले हम ,
पंथ यहाँ से जाते अनेक। 

किस पथ पर हम चलें बताओ ,
मन एकदम संत्रास हुआ। 




उमेश चंद्र श्रीवास्तव -
poem by Umesh chandra srivastava 

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