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Tuesday, September 27, 2016

वही रोज आना ,वही रोज जाना।-(3)

वही रोज आना ,वही रोज जाना।
वही रोज बातों का,कहना-सुनना।

यहाँ प्यार बस है ,यह प्यारा जगत है।
यहाँ प्रेम के ही वशर ,सब वशर हैं।
यहाँ प्यार जीस्त और जीस्त ही जगत है।
ठहर करके देखो -यह प्रेम नगर है।
यही देख-देखो , दिखाना-दिखाना।
यही बात सब को जाताना-सुनना।

यहाँ सब हैं योद्धा ,सभी प्रेम योद्धा।
नहीं है जगत में भी कोई विध्वंसक।
सभी जग के प्राणी अहिंसक-अहिंसक।
इन्हें प्यार दे दो ,ये प्रेमी, पुजारी।
करो 'औ' दिखाओ , ये करना-बताना।
जगत की यह बातें, सभी को सुनना।
 
वही रोज काली की  शक्ति बताना।
वही रोज दुर्गा की भक्ति  सुनना।
 समझ लो जगत की है धात्री हमारी।
यह शक्ति ,यह भक्ति सभी कुछ हमारी।
जनम देके सेवा जो करती हमारी।
उसे बस ही पूजो , उसे बस सराहो।
यही तुम बाताओ  सुनना -सुनना।
         वही रोज आना ,वही रोज जाना।
         वही रोज बातों का,कहना-सुनना।


उमेश चंद्र श्रीवास्तव -


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